Sunday, November 11

महात्मा गांधी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi | SabkiMadad

महात्मा गांधी की जीवनी



दोस्तों आज की बायोग्राफी पाठ में आज मैं आपको हमारे राष्ट्र पिता मोहनदास करमचंद गांधीजी के बारे में जानेंगे। ऐसे तो आपने कई जगह गांधी जी के बारे में पढ़ा या जाना होगा लेकिन उनमें से ज्यादातर किताबों में भारत के स्वतंत्र आंदोलन में उनकी भूमिका के बारे में ही बताया जाता हैं। लेकिन आज हम महात्मा गांधी जी के बारे में उनके जन्म से लेकर उनके मृत्यु तक की सारी बातें जानेंगे। तो शुरू करते हैं महात्मा गांधी की पूरी जीवनी हिंदी में।



महात्मा गांधी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi

महात्मा गांधी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi | SabkiMadad

महात्मा गांधी तथा मोहनदास करमचंद गांधी भारतीय स्वतंत्र सेनानी के प्रमुख नेता थे और भारत के स्वतंत्र होने में उनका सबसे ज्यादा हाथ था। खासकर उनकी अहिंसा दारा प्रचालित आंदोलन काफी मददगार रही थी और भारत को स्वतंत्र बनाने का प्रमुख कारण भी बने। अहिंसा दारा चालित उनके आंदोलन में से असहयोग आंदोलन , नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन ही प्रमुख हैं।  इन्हीं अहिंसा और सत्यता के दम पर लड़ाई लड़ के भारत को स्वाधीन करने के लिए आज उनको पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जाने जाते है जिसका अर्थ होता है महान आत्मा। उन्हें राष्ट्र पिता कहकर सम्मानित करने वाले प्रथम व्यक्ति थे सुभाष चन्द्र बोस। बोस ने 3 जुलाई 1944 में रंगून रेडियो में महात्मा गांधीजी के लिए जारी किया गया प्रसारण में गांधीजी को पहली बार राष्ट्र पिता कहकर पुकारा था। उन्हें बापू जी कहकर भी पुकारा जाता है जिसका अर्थ होता है पिताजी। उनकी जन्म जयंती को पूरे देश में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्त राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्रारंभिक जीवन

महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्तूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था और माँ का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी जी के पिताजी पोरबंदर के दीवान तथा मंत्री थे। उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई राजकोट में संपन्न किया था। 13 साल की उम्र में ही उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा माखनजी से हो गयी थी। जब उनकी शादी हुई थी तब उनको शादी का मतलब भी नहीं जानते थे। तब उनके लिए शादी का मतलब था नए कपड़े और मिठाइयाँ। जब गांधी जी 16 साल के और उनकी पत्नी 17 साल के थे तब उनका पहला बच्चा हुआ था जो की सिर्फ कुछ दिन ही जीवित रहे थे। उसके बाद कस्तूरबा जी ने 4 बेटे को जन्म दिया। उनके नाम थे हरीलाल , मनीलाल , रामदास और देवदास।

शिक्षा

गांधी जी ने 18 साल की उम्र में 1887 में अहमदाबाद के एक उच्च विद्यालय से अपनी स्कूल की पढ़ाई खतम करने के बाद उन्होंने भावनगर के शामलदास कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय के यूनिवरसिटि कॉलेज से अपनी बेरिस्टर की पढ़ाई की थी। 1891 में 22 साल की उम्र में वे लंडन से वापस भारत आ गए थे और मुंबई में अपनी वकालत की अभ्यास करने लगे लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली और वह वापस अपने घर राजकोट चले गए।

दक्षिण अफ्रीका में नागरिक अधिकार के लिए आंदोलन और महात्मा गांधी की भूमिका राजकोट में उनसे दादा अब्दुल्लाह नामक एक व्यापारी मिलने आए और उन्हें अपने चचेरे भाई की वकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका जाने का निमंत्रण दिया। 1893 में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका चले गए। वहाँ पर उन्होंने वर्ण और परंपरा के लिए बहुत ही भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्हें वैध टिकट होने के बावजूद प्रथम श्रेणी में सफर करने से माना किया गया और नहीं मानने पर उन्होंने मार भी खाई थी। इनके अलावा बहुत ऐसी बातों का जिक्र मिलता हैं की किस तरह से वहाँ उनके साथ भेदभाव हुआ। यहाँ तक की अदालत के न्यायाधीश ने भी उनको अपनी पगड़ी उतारने को कहा था। हाला की उनका काम 1894 में ही समाप्त हो गया था लेकिन वे दक्षिण अफ्रीका में चल रही इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वही ठहर गए। वहाँ वे 21 साल रहे और वही उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा आंदोलन की नींव रखी थी। 21 साल की कड़ी प्रतिवाद के बाद कम से कम गांधी जी भारतीय लोगों को vote देने का अधिकार और भारतीय विवाह प्रक्रिया को कानूनी तौर से वैध बनाने में कामयाब हो सके। गांधी जी अफ्रीका के मूल निवासियों के लिये भी प्रेरणा के श्रोत रहे थे। क्योंकि वहाँ के मूल निवासी भी कुछ उसी तरह के भेदभाव का शिकार थे।

भारत वापसी और स्वतंत्र संग्राम 

1915 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता गोपाल कृष्ण गोखले के अनुरोध पर गांधीजी वापस भारत लौट आए और भारत के समस्या , राजनीति की बुझ लेने लग गए। गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका में किए गए कामों के कारण विश्व में उनकी अच्छी छवि बन चुकी थी और काफी कम समय में वे बहुत ही लोकप्रिय बन गए थे। गांधी जी ने 1920 में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नेतृत्व करने लगे और लगातार ब्रिटिश राज से अपनी मांग करते रहे और अंत में 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को स्वाधीन करार कर दिया। लेकिन ब्रिटिश राज ने अभी तक भारत की स्वतंत्रता को मंजूरी नहीं दिया था। फिर अंत में भारत को विभाजित करके ब्रिटिश ने भारत और पाकिस्तान को 1947 में आजादी दे दी।

चंपारण और खेड़ा आंदोलन (
Kheda Movement)

जब गांधी जी भारत आए थे तब उनको ब्रिटिश राज के नियम से कोई शिकायत नहीं थी बल्कि वे ब्रिटिश राज के काम से खुश थे। लेकिन चंपारण और खेड़ा में हुए वाकयात से उनका मन दृष्टि ब्रिटिश राज के लिए बिलकुल ही बादल गया। वे समझ गए थे की ब्रिटिश भारतीय लोगों के साथ सालो से अत्याचार करते आ रहे हैं और वे स्वराज तथा स्वाधीन भारत की कल्पना करने लग गए। 1917 में बिहार के चंपारण में भूमि कर को लेके जो अत्याचार वहाँ के किसानों के साथ हुए थे उनको विस्तार से समझ ने के बाद और सालो से हो रहे अन्याय को जानने के बाद उनके मन ने ब्रिटिश राज विरोधी भावना यों का उजागर होता है।


इस घटना के कुछ ही महीने बाद 1918 में  खेड़ा में भी उसी तरह का वाकयात होता है जिसके बाद उनकी ब्रिटिश विरोधी मन दृष्टि और मजबूत हो जाती है। उसके बाद वे आजाद भारत के निर्माण के लिए चल पड़ते है।


गांधी जी के 3 प्रमुख आंदोलन

असहयोग आंदोलन (
Non-Cooperation Movement) : 1909 से ही गांधी जी ने हिन्द स्वराज की परिकल्पना करने लगे थे। उन्हें यह मालूम हो गया था की लोगों के साथ हो रहे अत्याचार की सबसे बड़ी वजह ब्रिटिश राज के प्रति लोगों का डर हैं और यह डर स्वराज से ही खतम हो सकता हैं। जब गाँव के लोग अपने पेड़ों पर खरे हो सकेंगे और ब्रिटिश राज के ऊपर निर्भर होना छोर देंगे तभी लोगों को उनका हक मिलेगा। हिन्द स्वराज का मतलब ही था भारत के पिछले इलाके में रह रहे लोगों को आत्म निर्भर बनाना। गांधी जी का कहना था की ब्रिटिश राज शक्तिशाली होने का कारण ही यही है की लोग उनसे ऊपर निर्भर है। अगर लोग ब्रिटिश का सहयोग नहीं करते , उनके कारखाने में बनी छीजो को उपयोग नहीं करते हैं तो ब्रिटिश राज की ताकत अपने आप ही कम हो जाएगी।

असहयोग आंदोलन की शुरू वात होती है रॉलेट एक्ट को लेकर। ब्रिटिश सरकार 1919 के फ़रवरी महीने में भारत में रॉलेट एक्ट लागू करते है। जिसके विरोध में गांधी जी लोगों को सत्याग्रह में शामिल होने को कहते है। सरकार विरोधी यह आंदोलन हिंसा ना हो इसका भी गांधी जी पूरा खयाल रखते थे और लोगों को हिंसा ना करने की सलाह भी देते थे। असहयोग आंदोलन ने बहुत ही जल्द लोकप्रियता हासिल कर ली थी और लोग इसके समर्थन में एक जुट होकर खरे थे। जब ब्रिटिश राज को लगा की अब परिस्थिति नियंत्रण में नहीं रही तब उन्होने गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया और उसी के साथ भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस भी दो गुटों में बट गयी। एक दल का नेतृत्व सदन में पार्टी की भागीदारी के पक्ष वाले चित्त रंजन दास तथा मोतीलाल नेहरू ने किया तो दूसरे दल का नेतृत्व इसके विपरीत चलने वाले चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। उसके अलावा गांधी जी चाहते थे की यह आंदोलन अहिंसा से किया जाये लेकिन देश की विभिन्न प्रान्तों से हिंसा की खबर आ रही थी जिसके कारण गांधी जी को यह आंदोलन हमेशा के लिए स्थगित रखना पड़ा।

नमक सत्याग्रह (
Salt March: असहयोग आंदोलन स्थगित होने के बाद भी गांधी जी बाकी छोटे छोटे विषय पर विरोध करते रहे। 1928 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गांधी जी ने ब्रिटिश राज को भारतीय साम्राज्य को सत्ता प्रदान करने के लिए कहा और उसके बाद 1 साल तक ब्रिटिश सरकार के जवाब का इंतजार करते रहे। ब्रिटिश सरकार की तरफ से जवाब न मिलने के कारण भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार 31 दिसम्बर 1929 में लाहोर में भारतीय झंडा फहराया और 26 जनवरी 1930 को लाहोर में ही भारतीय स्वतंत्र दिवस भी मनाया गया। उसके बाद मार्च 1930 में नमक कर के प्रतिवाद में गांधी जी गुजरात में नमक सत्याग्रह करते है और अहमदाबाद से दांडी तक पैदल यात्रा करते है। इस पद यात्रा में बहुत ही भीड़ इकट्ठा होते हैं और इसके जवाब में ब्रिटिश सरकार महात्मा गांधी सहित 60,000 लोगो को गिरफ्तार करते हैं।

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) : जनवरी 1931 को गांधी जी को कारागार से रिहा किया जाता है और उसके 2 महीने के अंदर ही गांधी जी लॉर्ड इरविन से नमक सत्याग्रह तोड़ने का समझौता करते है। इस समझौता में गांधी जी सत्याग्रह तोड़ने के बदले में सत्याग्रह में गिरफ्तार किए गए सारे लोगों को रिहाई और भारतीय लोगों को नमक प्रस्तुत करने की अनुमति मांगते है और लॉर्ड इरविन इसके लिए तैयार हो जाते है। 1932 में महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़ देते है और देश के बाकी समस्या समाधान के लिए काम करते है। वही कांग्रेस का नेतृत्व जहरलाल नेहरू के हाथ में आ जाता है।

1942 में गांधी जी भारत छोड़ो आंदोलन को आरंभ कर देते है और लोगों से ब्रिटिश राज को पूरी तोड़ से सहयोग देने को माना करते है। वही दूसरी तरफ दूसरे विश्व युद्ध की वजह से ब्रिटइन की ताकत बहुत ही कम हो गयी थी। उसके बाद गांधी जी को और कांग्रेस के अन्य सदस्य को गिरफ्तार किया जाता हैं। गांधी जी को 2 साल तक बंदी बनाया गया और उसी बीच उनकी पत्नी की 74 साल के उम्र में मृत्यु हो जाती है। गांधी जी को 6 मई 1944 में उनकी खराब स्वास्थ्य के कारण रिहा किया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध के अंत में ही ब्रिटिश राज ने भारत को स्वतंत्रता देने का संकेत दे दिया था।

1945 के ब्रिटिश साधारण चुनाव में Labour Party की जीत हो जाती है और उसी के साथ भारत की स्वतंत्रता तथा देश विभाजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अंत में 14 अगस्त 1947 को देश विभाजित हो जाता है और नया राष्ट्र पाकिस्तान का जन्म होता है। पाकिस्तान के आजाद होने के एक दिन बाद भारत को भी कानूनी तौर पर स्वतंत्रता मिल जाता है।

गांधी जी की हत्या (Death Of Mahatma Gandhi)

गांधी जी को हिंदु महासभा के साथ संबंधित नाथूराम गोडसे द्वारा बिड़ला भवन में गोली मारकर हत्या कर दी गई। गांधी के हत्यारे नथुराम गोडसे ने गांधी जी को पाकिस्तान को भुगतान करने के मुद्दे को लेकर भारत को कमजोर बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उसी वजह से उन्होंने गांधी जी की हत्या की थी। गोड़से और उनके सह षड्यंत्रकारी नारायण आप्टे को १५ नवंबर १९४९ को फांसी दे दी गई।

Author Bio:

Name – Biswajit Sharma

Occupation – Content Writer/Blogger

Website – www.tuhiranews.com

Personal Email – biswajitbimoli@gmail.com

Blog Email – mail@tuhiranews.com

About Biography – यह जीवनी उन लोगों के लिए है जो महात्मा गांधी जी के बारे में शुरू से जानना चाहते है और उनकी विचारधारा के बारे के जानना चाहते हैं। आशा करता हु आपको यह जीवनी पढ़कर कुछ सीखने को मिला हो। अगर आपको हमारी यह article पसंद आई तो अपने दोस्तो के साथ जरूर share करें।

About Me – दोस्तों मेरा नाम विस्वजित शर्मा है और पेशे से मैं एक ब्लॉगर हूँ। अगर आपको मेरा लेख पसंद आया है तो आप मेरे वैबसाइट www.tuhiranews.com पर मेरे लेख पढ़ सकते हैं।

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